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वृषाली...स्त्री का त्याग..!!

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महाभारत की एक विस्मृत कथा ....कर्ण की पत्नी, वह स्त्री जिसे कभी चुना नहीं गया जब लोग कर्ण की बात करते हैं, तो वे उसके दुख, निष्ठा और भाग्य की चर्चा करते हैं। पर बहुत कम लोग उस स्त्री को याद करते हैं जिसने उसके जीवन को मौन होकर साझा किया उसकी पत्नी वृषाली। वह शक्ति के किसी महल में जन्मी नहीं थी। वह ऐसी रानी भी नहीं थी जो युद्धों की दिशा बदलती। फिर भी उसने महाभारत का सबसे भारी भाग्य अपने हृदय में उठाया। वृषाली कौन थी? वृषाली कर्ण की प्रथम और मुख्य पत्नी थी— सरल, शालीन और गरिमामयी। उसने कर्ण से विवाह तब किया जब वह अंग देश का राजा भी नहीं बना था, जब संसार उसे अब भी सूत-पुत्र कहकर अपमानित करता था। 👉 उसने किसी नायक से विवाह नहीं किया। 👉 उसने उस पुरुष से विवाह किया जिसे समाज ने ठुकरा दिया था। और उसने उसे कभी नहीं छोड़ा। वह अपमान जिसने सब कुछ बदल दिया द्रौपदी के स्वयंवर में कर्ण आगे बढ़ा। धनुष उठाने से पहले ही द्रौपदी ने उसे उसकी जाति के कारण सार्वजनिक रूप से अस्वीकार कर दिया। उस अपमान ने कर्ण के आत्मसम्मान को तोड़ दिया। पर जिसे लोग भूल जाते हैं, वह यह है—  • वह अपमान केवल कर...

यादें

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कितना अजीब है ना,  दिसंबर और जनवरी का रिश्ता ? जैसे पुरानी यादों और नए वादों का किस्सा भरपूर विश्वास है दोनों आसपास है फिर भी एक साल की प्यास है ख़ूबसूरत पलों के झरोखे दिल में गुलदस्ते सज़ा लेते हैं गुलाबों के बीच ख़ुद  को बगिया बना लेते हैं। इस कद्र को अपने होने का  एहसास जगा जाता है गुज़रा साल दिल में  दोनो मे गहराई है दोनों वक़्त के राही है यूँ तो दोनों का है वही चेहरा-वही रंग उतनी ही तारीखें  पर पहचान अलग है दोनों की अलग है अंदाज़ और  अलग हैं ढंग... एक अन्त है एक शुरू
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तू शोर है मेरा, मैं तेरी खामोशी मौनरूपी व्याख्या की महिमा प्रभावशाली होती है ।   उसके सामने क्या मातृभाषा क्या अन्य देश की भाषा सब को सब कुछ प्रतीत होती है । अन्य कोई भाषा दिव्य नहीं केवल व्याख्यान की मौनभाषा ईश्वरीय है । यदि विचार करके देखा जाए तो मौन व्याख्यान किस तरह हमारे हृदय की नाडी में  सुंदरता पिरो देता है ।  वह व्याख्यान ही क्या जिसमे हृदय की धुन को तथा बल के लक्ष्य को ना बदल दिया । चंद्रमा की मंद मंद हंसी का ,,, तारागणों  के कटाक्ष पूर्ण मौन व्याख्यान का प्रभाव ।  किसी कवि के दिल में घुस कर देखा ,,,, कमल और नरगिस में नयन देखने वालों से पूछो कि मौन व्याख्यान,,, की प्रभुता कितनी दिव्य है ,,, मौन की शक्ति की भावना पर आधारित है कि मौन तो ईश्वर प्रदत्त भाषा है ।  इससे आत्मिक गुणों का विकास तो होता ही है अपितु आत्मबल भी बढ़ता है । व्याख्यान व्यक्तित्व के निर्माण तथा विचारधारा को पुष्ट करने में अपनी महती भूमिका निभाता है । व्याख्यान अपने आप में अनेक भागों तथा सिद्धांतों को पिरोए हुए होता है ।  जिससे मानव के हृदय पर अनुकूल प्रभाव पड़े...

हिसाब नहीं रख पाती है स्त्री,,,

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कहा जाता हैं कि,,  स्त्री गणित में कमजोर होती हैं.. कमसे कम उनके निजी जीवन में तो ये बात बिल्कुल सही बैठती हैं.. अगर कोई उन्हें अँजुली भर भी प्रेम दें तो वो उसे प्रेम का सागर बनाकर लौटाती हैं..  उन्हें जो भी मिलता हैं वे उसमें वृद्धि कर के ही लौटाती हैं.. फिर चाहे वो प्रेम हो..सम्मान हो..या अपमान..!! लेकिन मै तो यही कहूंगी कि   स्त्री गणित में कमजोर नहीं, बस उनके हिसाब अलग होते हैं। जहाँ उन्हें मुट्ठी भर प्रेम मिले, वहाँ वो सागर लुटा देती हैं। पर अगर अपमान मिले, तो वही हिसाब कई गुना होकर लौटता है। ये उनकी ताकत है, जो हर एहसास को बढ़ाकर लौटाने का हुनर रखती हैं। आप दुनिया को देखिए ना। बेचारी स्त्रियां किसी क्षेत्र में अग्रणी नहीं हो पाई। राजनीति में देखिए, नहीं दिखाई देंगी; कला में देखिए, कम दिखाई देंगी; विज्ञान में देखिए, कम दिखाई देंगी। वो घरों में बस दिखाई देती हैं, और इसमें बहुत बड़ा योगदान भावनाओं का है। वो भावुक ही पड़ी रह जाती हैं, और कुछ नहीं कर पाती जिंदगी में। अबला जीवन हाय तुम्हारी यही कहानी, आंचल में है दूध और आंखों में पानी। इन दो चीज़ों के अलावा स्...

क्या लिखूं,,,??

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नए पाठक लम्बा साहित्य पढ़ने से घबराते हैं।  यही कारण है कि वर्तमान में सबसे ज़्यादा कविताएँ लिखी जा रही हैं।  इतनी ज़्यादा लिखी जा रही हैं कि पढ़ने वालों की कमी हो गई है। आज के दौर में कविताएँ लिखने का एक सबसे बड़ा फ़ायदा यह है कि उसे बड़े पाठक वर्ग तक पहुँचाने के लिए आपको संग्रह छपवाने की आवश्यकता नहीं है।  आप सोशल मीडिया पर अपलोड करके भी उचित प्रतिक्रिया पा सकते हैं। जबकि कहानी और उपन्यास के साथ ऐसा नहीं है।  इसके लिए आपको किताब छपवानी ही पड़ेगी। सोशल मीडिया पर इतना लंबा साहित्य कोई नहीं पढ़ेगा। खासकर तब जब आपका मनोरंजन 10 सेकंड की रील देखकर हो जा रहा हो। साहित्य वही जीवंत होता है, जो मन के किसी कोने को छू जाए । वरना, कई किताबें बस ऐसे ही लिख दी जाती हैं - ना उनमें कोई दिशा होती है, ना कोई दिल । कभी-कभी सोचती हूँ कि कोई किताब लिखूँ पर अभी लिखना शुरू भी नहीं किया है मैंने और किताब के अंत से डर गई हूँ.. सोचती हूँ कि क्या मैं कहानी को अंत तक ले कर जा भी पाऊँगी या नहीं या ले कर गई भी तो क्या मेरी ज़िंदगी में आई कई कहानियों की तरह उसका भी अंत होगा, भयावह। जो...

you are special,,,,,

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असफलता जीवन का एक ऐसा अध्याय है, जिसे हम भले ही पसंद न करें, लेकिन यह हमें सिखाने के लिए आती है।  असफलता हमें हमारी कमजोरियों को पहचानने और मजबूत बनने का अवसर देती है। यह हमें याद दिलाती है कि गिरना कोई अपराध नहीं है, लेकिन गिरकर उठना और फिर से प्रयास करना हमारी ताकत है। प्रत्येक उत्कृष्ट कार्य पहले पहल असम्भव होता है।  ~ थॉमस कार्लेले  लाइब्रेरी में किताबों के साथ बिताया समय, असफलताओं से मिली सीख, दोस्तों का साथ और जीवन की हर छोटी-बड़ी खुशियां, यही हमें एक संपूर्ण और सुंदर जीवन जीने का रास्ता दिखाती हैं। याद रखिये,,, एक इच्छा कुछ नही बदलती, एक निर्णय कुछ बदलता है...लेकिन एक निश्चय सब कुछ बदल देता है।  जब भी जीवन में संकट आता है  सहनशक्ति पैदा कीजिए ….. जो सहता है वो रहता है... आत्मविश्वास जिंदगी की सबसे  खूबसूरत होती है जो आपके पूरे  जीवन को खूबसूरत बनाये रखती है।  तारों में तुम सूर्य हो.. ग्रहों में तुम बृहस्पति..   द्वीपों में तुम गैलापागोस हो... महाद्वीपों में  जम्बुद्वीप.. पर्वतों में तुम कैलाश हो... महासागरों में प...

मानसिक विकृति

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मानसिक_विकृतता   1. अकेली रहती है! मतलब साथ (सेक्स) की जरूरत तो होगी ही, ट्राय तो मार मौज़ करने के लिए बेस्ट ऑप्शन है।   2. बाहर रहकर पढ़ी है मतलब घाट-घाट का पानी पी हुई है। पक्का कैरेक्टरलेस है। हाथ रखते ही तैयार हो जाएगी।  ऐसों का क्या ?   3. दिल्ली में रहती है मतलब खुली होगी। मेट्रो सिटीज़ में रहने वाली लड़कियां तो बहुत खुली होती हैं, पता नहीं कितनों के साथ सो जाए। यहाँ खुली का मतलब सेक्स के लिए हमेशा आसानी से उपलब्ध रहने से है।  3. गाँव की है, सीधी होगी। मतलब इसको आसानी से बेवकूफ़ बनाकर यूज़ कर सकते हैं।   4. ब्रेकअप हो गया है! मतलब रोती लड़की को विश्वास देकर सेक्स की जुगाड़ की जा सकती है।   5. पहले बॉयफ्रेंड ने चीट किया है! ओह्ह बेबी मैं ऐसा नहीं हूँ। दुनिया से अलग हूँ। यार चीट हुई लड़कियों को यूज़ करना औऱ आसान है।  सिली गर्ल्स......  6. नीच जात की है! यार ये छोटी जातियां होती बहुत बेवकूफ़ हैं। मैं जाति को नहीं मानता, शादी करूँगा बस इतने में तो तन- मन-धन से समर्पित हो जायेंगी।   7. काल...