यादें
कितना अजीब है ना, दिसंबर और जनवरी का रिश्ता ? जैसे पुरानी यादों और नए वादों का किस्सा भरपूर विश्वास है दोनों आसपास है फिर भी एक साल की प्यास है ख़ूबसूरत पलों के झरोखे दिल में गुलदस्ते सज़ा लेते हैं गुलाबों के बीच ख़ुद को बगिया बना लेते हैं। इस कद्र को अपने होने का एहसास जगा जाता है गुज़रा साल दिल में दोनो मे गहराई है दोनों वक़्त के राही है यूँ तो दोनों का है वही चेहरा-वही रंग उतनी ही तारीखें पर पहचान अलग है दोनों की अलग है अंदाज़ और अलग हैं ढंग... एक अन्त है एक शुरू
Good thing true words
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