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Showing posts from April, 2026
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तू शोर है मेरा, मैं तेरी खामोशी मौनरूपी व्याख्या की महिमा प्रभावशाली होती है ।   उसके सामने क्या मातृभाषा क्या अन्य देश की भाषा सब को सब कुछ प्रतीत होती है । अन्य कोई भाषा दिव्य नहीं केवल व्याख्यान की मौनभाषा ईश्वरीय है । यदि विचार करके देखा जाए तो मौन व्याख्यान किस तरह हमारे हृदय की नाडी में  सुंदरता पिरो देता है ।  वह व्याख्यान ही क्या जिसमे हृदय की धुन को तथा बल के लक्ष्य को ना बदल दिया । चंद्रमा की मंद मंद हंसी का ,,, तारागणों  के कटाक्ष पूर्ण मौन व्याख्यान का प्रभाव ।  किसी कवि के दिल में घुस कर देखा ,,,, कमल और नरगिस में नयन देखने वालों से पूछो कि मौन व्याख्यान,,, की प्रभुता कितनी दिव्य है ,,, मौन की शक्ति की भावना पर आधारित है कि मौन तो ईश्वर प्रदत्त भाषा है ।  इससे आत्मिक गुणों का विकास तो होता ही है अपितु आत्मबल भी बढ़ता है । व्याख्यान व्यक्तित्व के निर्माण तथा विचारधारा को पुष्ट करने में अपनी महती भूमिका निभाता है । व्याख्यान अपने आप में अनेक भागों तथा सिद्धांतों को पिरोए हुए होता है ।  जिससे मानव के हृदय पर अनुकूल प्रभाव पड़े...

वृषाली...स्त्री का त्याग..!!

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महाभारत की एक विस्मृत कथा ....कर्ण की पत्नी, वह स्त्री जिसे कभी चुना नहीं गया जब लोग कर्ण की बात करते हैं, तो वे उसके दुख, निष्ठा और भाग्य की चर्चा करते हैं। पर बहुत कम लोग उस स्त्री को याद करते हैं जिसने उसके जीवन को मौन होकर साझा किया उसकी पत्नी वृषाली। वह शक्ति के किसी महल में जन्मी नहीं थी। वह ऐसी रानी भी नहीं थी जो युद्धों की दिशा बदलती। फिर भी उसने महाभारत का सबसे भारी भाग्य अपने हृदय में उठाया। वृषाली कौन थी? वृषाली कर्ण की प्रथम और मुख्य पत्नी थी— सरल, शालीन और गरिमामयी। उसने कर्ण से विवाह तब किया जब वह अंग देश का राजा भी नहीं बना था, जब संसार उसे अब भी सूत-पुत्र कहकर अपमानित करता था। 👉 उसने किसी नायक से विवाह नहीं किया। 👉 उसने उस पुरुष से विवाह किया जिसे समाज ने ठुकरा दिया था। और उसने उसे कभी नहीं छोड़ा। वह अपमान जिसने सब कुछ बदल दिया द्रौपदी के स्वयंवर में कर्ण आगे बढ़ा। धनुष उठाने से पहले ही द्रौपदी ने उसे उसकी जाति के कारण सार्वजनिक रूप से अस्वीकार कर दिया। उस अपमान ने कर्ण के आत्मसम्मान को तोड़ दिया। पर जिसे लोग भूल जाते हैं, वह यह है—  • वह अपमान केवल कर...