नारी: एक संकल्प
नारी: एक संकल्प! 🌸
तुम्हारा स्त्री होना ही सबसे सुंदर है, यह कोई दुर्भाग्य नहीं सौभाग्य की बात है कि तुम स्त्री हो... इस दुनिया में किसी के बिना कुछ खास नहीं बदलेगा पर तुम्हारे बिना दुनिया का कोई अस्तित्व नहीं... गर्व करो कि तुम स्त्री हो.!
“तुम मेरे हृदय की वो भावना हो
जिसे शब्दों में नहीं
मूक संवाद में भी
व्यक्त नहीं किया जा सकता
तुम तो
स्पंदन हो हृदय का
देह का अर्धांग हो
अदृश्य-अनुभूति हो
जो अमर्त्य है सदा !!”
सही बात. स्त्री के अनेक रूप होते हैं मां, बहन, बेटी लेकिन सबसे खूबसूरत होती है पत्नी, जिसमें हम सब रिश्तों की झलक देखते हैं। परन्तुनाजकल की स्त्रियों ने पत्नी को इतना बदनाम कर दिया कि कुछ बी से लोग बचते हैं, कभी अवैध संबंधों से, कभी 498 के नाम पर kabhi gharelu hinsa ke naam per.
कुछ स्त्रियां जब तक
मर्यादा में रहकर...
सब कुछ सहती हैं
बिना एक शब्द कहे
तब तक वे उस घर परिवार की
लक्ष्मी कहलाती हैं
लेकिन जिस दिन वो
अपने ऊपर हो रहे अत्याचार
या दुराचार के खिलाफ
बोलना शुरू कर दें
गलत बातों का जवाब देना शुरू कर दे
वो तब से कुल्टा,चरित्रहीन
और संस्कार विहीन कहलाने लगती हैं
समाज ने इस बात को कभी
समझा ही नहीं कि हमारे संस्कार
हमें मान,अपमान सब कुछ सिखाते हैं
कितना सहना है ..?
कहां तक सहना है ये भी ?
सहनशीलता की भी एक सीमा होती है
यदि वो सीमा लांघ दी जाए तो फिर
संस्कारों का बांध भी टूट ही जाता है
आखिर कोई कब तक सहेगा ..?
हां कुछ स्त्रियां हैं जो बिना अत्याचारों
बिना किसी बंधनों के ही
मर्यादाएं लांघती रहती हैं
मेरे लिए वो मायने नहीं रखती
पर वो खुश और स्वस्थ रहती हैं..
मै सिर्फ उनकी बात कर रही हूं
जिन्हें मजबूरी में आवाज
और अपने कदम बढ़ाने पड़ते हैं
वो लाचार नहीं होती
बस संस्कारों में बंधी होती हैं
लेकिन समाज को उनका बदलाव
रास नहीं आता और
वे स्त्रियां समाज की नजरों में
चरित्रहीन बन जाती हैं
तो क्या...
अपनी जिंदगी अपनी खुशी के लिए समाज की तोहमत को नजर अंदाज कर देना चाहिए या फिर हालात जो भी हो सहते जाना चाहिए...??
एक स्त्री की ऑंखें सुंदर बताई जाती है
कविताओं मे और शायरी मे ,
लेकिन कभी पढ़ी नहीं जाती यातनाएं और
समझी नहीं जाती भावनाये उनकी.... ।
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