हारना नहीं है ,,,,
हार कोई विराम नहीं होती,
वो तो बस एक अदृश्य द्वार है –
जहाँ से लौटकर वही आता है
जो खुद को फिर से गढ़ने का साहस रखता है…
शून्य तो सिर्फ़ एक भ्रम है,
असल में हर गिरावट अपने साथ
अनकहे सबक़ों की पूँजी छोड़ जाती है…
इसलिए जब तुम दोबारा चलोगे,
तो कदम नए नहीं होंगे –
पर उनकी दिशा में वो गहराई होगी
जो पहले कभी थी ही नहीं…
क्योंकि कुछ शुरुआतें दिखाई नहीं देतीं,
वो भीतर होती हैं –
और वही शुरुआतें सबसे दूर तक जाती हैं…
हार असल में अंत नहीं, बल्कि आत्मा को फिर से तराशने का सबसे सुंदर अवसर है।
जो गिरकर भी उठता है, वो सिर्फ़ चलना नहीं सीखता — वो रास्ता खुद बनाना सीख जाता है।
"कुछ शुरुआतें दिखाई नहीं देतीं, वो भीतर होती हैं"
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