Posts

औरत

Image
एक औरत का जन्म                                     कितनी बार होता है एक जन्म,उसे अपनो मां से मिलता है जिसकी आयु विवाह तक रहती फिर एक नया जन्म  नया घर नये लोग नई दुनियां                        फिर एक जन्म लेती है  जब वो जन्म देती है जितनी बार जन्म देती है                              उतनी बार जन्म लेती है लेकिन मरती कितनी बार है                          जन्म लेने से लेकर देह छोड़ देने के बीच अपनी अपेक्षाओं में मरती                            उपेक्षाओं  पे मरती  हर त्याग के बाद  मरती हर समर्पण के पहले मरती                          ...

स्त्री

Image
स् त्री के लिए प्रेम का मतलब होता है सब कुछ मिला कर एक ही में केंद्रित कर देना फिर स्त्री की हर बात, हर सोच, हर चाह उसी एक केंद्र के चारों तरफ़ घूमती रहती है । शायर स्त्री को शमा और पुरुष को परवाना कहते हैं लेकिन सच्चाई तो यह है स्त्री ही परवाना है वो जिसे प्रेम करती है उसी में समा जाना चाहती है चाहे उसका ख़ुद का अस्तित्व ही क्यों ना ख़त्म हो जाए वो उसी के अस्तित्व में मिल जाना चाहती है । स्त्री का प्रेम बहुत हद तक मान, अपमान, अपेक्षा, उपेक्षा से परे होता है उसका क्रोध उसकी चिड़चिड़ाहट भी तभी प्रकट होती है जब उसे प्रेम के बदले प्रेम ना मिले वो कम प्रेम में ख़ुश रह सकती है लेकिन उसे प्रेम के बदले प्रेम चाहिए । स्त्री तब तक सब कुछ सहन कर लेती है जब तक उसे विश्वास हो की वो जिसे चाहती है वो भी उसे ही प्रेम करता है जो स्त्री परस्पर प्रेम में होती है वो एक गहरी नींद में होती है और सब कुछ स्वप्न होता है वो इसी स्वप्न में रहना चाहती हमेशा हमेशा के लिए । वो जिसे चाहती है सिर्फ़ उसी के साथ मारते दम तक उसी की हो कर रहना चाहती है । और पुरुष के लिए प्रेम का मतलब है इकछाओं का ढेर, उसी ढेर में क...

Happy women's Day

Image
एक शादी_शुदा स्त्री, जब किसी पुरूष से मिलती है... उसे जाने अनजाने मे अपना दोस्त बनाती है.... तो वो जानती है की न तो वो उसकी हो सकती है.... और न ही वो उसका हो सकता है.... वो उसे पा भी नही सकती और खोना भी नही चाहती.. फिर भी वह इस रिश्ते को वो अपने मन की चुनी डोर से बांध लेती है.... तो क्या वो इस समाज के नियमो को नही मानती? क्या वो अपने सीमा की दहलीज को नही जानती? जी नहीं....!! वो समाज के नियमो को भी मानती है.... और अपने सीमा की दहलीज को भी जानती है... मगर कुछ पल के लिए वो अपनी जिम्मेदारी भूल जाना चाहती है...!! कुछ खट्टा... कुछ मीठा.... आपस मे बांटना चाहती है .. जो शायद कही और किसी के पास नही बांटा जा सकता है... वो उस शख्स से कुछ एहसास बांटना चाहती है... जो उसके मन के भीतर ही रह गए है कई सालों से... थोडा हँसना चाहती है... खिलखिलाना चाहती हैं... वो चाहती है की कोई उसे भी समझे बिन कहे... सारा दिन सबकी फिक्र करने वाली स्त्री चाहती है की कोई उसकी भी फिक्र करे... वो बस अपने मन की बात कहना चाहती है... जो रिश्तो और जिम्मेदारी की डोर से आजाद हो... कुछ पल बिताना चाहत...

चरित्रहीन कोन ,,,,,??

Image
#औरत_कभी_चरित्रहीन_नही_होती औरत के चरित्रहीन होने से पहले पुरुष अपना चरित्र खोता है ! औरतों को नीचा दिखाने का सबसे सरल और सबसे ज्यादा इस्तेमाल होने वाला तरीक़ा है कि उसे वेश्या, कैरेक्टरलेस कह दिया जाये, या उसे अपने किसी गलत तरीके से उसकी तरफ इशारा किया जायें। ये बात और है कि हमारा समाज इस बात पर कभी ध्यान नहीं देता कि वो वेश्या अकेले कैसे बन जाएगी ? उसको वेश्या बनाने में किसी पुरुष का होना बेहद ज़रूरी है। जब एक स्त्री नंगी होती है, देह बेचने के लिए, तो पुरुष अपने कपड़े पहले ही उतार चुका होता है। वेश्या की ईमानदारी तो है कि वो एक जगह पर वेश्या है, लेकिन पुरुष का क्या जो अपने घर की दहलीज़ पर अपने तथाकथित चरित्र को त्याग कर किसी वेश्या के वक्षस्थल पर अपने हाथ फिराने आता है ? उस पुरुष को वेश्या कहने में संकोच कैसा ? तुम्हें अपने हिस्से का आनंद भी चाहिए, तुम्हें विवाह से बाहर किसी दूसरी स्त्री के साथ सेक्स भी चाहिए और चाहिए चरित्र भी। वाह ! और वहाँ से निकलते हुए, या उसी बिस्तर पर नग्नावस्था में, तुम उसे वेश्या कहकर गाली देने से भी नहीं हिचकते। जबकि वेश्या तो असल में तुम हो, वो तो अ...

ढाई अक्षर

Image
मुझे ठीक से याद नहीं है कि मैने कब पढा था *पोथी पढ़ पढ़ जग मुआ पंडित भया न कोय *ढाई अक्षर प्रेम का पढ़े सो पंडित होय* अब पता लगा ये ढाई अक्षर क्या है- ढाई अक्षर के ब्रह्मा और ढाई अक्षर की सृष्टि। ढाई अक्षर के विष्णु और ढाई अक्षर की लक्ष्मी। ढाई अक्षर के कृष्ण ढाई अक्षर की दुर्गा और ढाई अक्षर की शक्ति। ढाई अक्षर की श्रद्धा और ढाई अक्षर की भक्ति। ढाई अक्षर का त्याग और ढाई अक्षर का ध्यान। ढाई अक्षर की तुष्टि और ढाई अक्षर की इच्छा। ढाई अक्षर का धर्म और ढाई अक्षर का कर्म। ढाई अक्षर का भाग्य और ढाई अक्षर की व्यथा। ढाई अक्षर का ग्रन्थ, और ढाई अक्षर का सन्त। ढाई अक्षर का शब्द और ढाई अक्षर का अर्थ। ढाई अक्षर का सत्य और ढाई अक्षर की मिथ्या। ढाई अक्षर की श्रुति और ढाई अक्षर की ध्वनि। ढाई अक्षर की अग्नि और ढाई अक्षर का कुण्ड। ढाई अक्षर का मन्त्र और ढाई अक्षर का यन्त्र। ढाई अक्षर की श्वांस और ढाई अक्षर के प्राण। ढाई अक्षर का जन्म ढाई अक्षर की मृत्यु। ढाई अक्षर की अस्थि और ढाई अक्षर की अर्थी। ढाई अक्षर का प्यार और ढाई अक्षर का युद्ध। ढाई अक्षर का प्रेम और ढाई...

कहावत का चमत्कार

Image
* ये चमत्कार हिंदी में ही हो सकता है …* *चार मिले चौंसठ खिले, बीस रहे कर जोड़!* *प्रेमी सज्जन दो मिले, खिल गए सात करोड़!!* मुझसे एक बुजुर्गवार ने इस कहावत का अर्थ पूछा.... काफी सोच-विचार के बाद भी जब मैं बता नहीं पायी, तो मैंने कहा – "बाबा आप ही बताइए, मेरी समझ में तो कुछ नहीं आ रहा !" तब एक रहस्यमयी मुस्कान के साथ बाबा समझाने लगे – "देखो बेटी, यह बड़े रहस्य की बात है... चार मिले – मतलब जब भी कोई मिलता है, तो सबसे पहले आपस में दोनों की आंखें मिलती हैं, इसलिए कहा, चार मिले ! फिर कहा, चौसठ खिले – यानि दोनों के बत्तीस-बत्तीस दांत – कुल मिलाकर चौंसठ हो गए, इस तरह “चार मिले, चौंसठ खिले” हुआ!" “बीस रहे कर जोड़” – दोनों हाथों की दस उंगलियां – दोनों व्यक्तियों की 20 हुईं – बीसों मिलकर ही एक-दूसरे को प्रणाम की मुद्रा में हाथ बरबस उठ ही जाते हैं!" “प्रेमी सज्जन दो मिले” – जब दो आत्मीय जन मिलें – यह बड़े रहस्य की बात है – क्योंकि मिलने वालों में आत्मीयता नहीं हुई तो “न बीस रहे कर जोड़” होगा और न "चौंसठ खिलेंगे” उन्होंने आगे कहा, "वैसे तो शरीर में रोम की गि...

स्त्री

Image
स्त्री तो अनादि काल से ही मानव ह्रदय की राग आत्मक व्रतियों की प्रेरणा स्त्रोत रही है ।   द्विवेदी जी ने स्त्री पक्ष का समर्थन करते हुए कहा है कि --- "पति को देवतुल्य हम माने , बच्चों की भी दासी है , सेवा सदा करे नहीं सोचे , भूखी हो या प्यासी हे भगवान हाय तिस पर भी उपमा कैसे आती है ढोल - तुल्य ताड़न अधिकारी हम बनाई जाती हैं ।"  इस प्रकार स्त्री की उच्च भावना का विकास इन पंक्तियों में देखा जा सकता है । आधुनिक स्त्री ने स्वयं के महत्व को प्रतिष्ठित किया है । स्त्री में स्वाभिमान और आत्म समर्पण की भावना अत्यधिक होती है उसे आप अपने अधिकारों की चिंता है क्योंकि वह अब शिक्षित है स्त्रियों ने आज विभिन्न क्षेत्रों में सफलतापूर्वक प्रवेश किया है  शिक्षक , डॉक्टर , वकील और प्रशासक के रूप में स्त्री ने अपनी प्रभावी भूमिका भी निभाई है । यह सिद्ध सत्य है कि यदि माता शिक्षित नहीं होगी तो देश की संतानों का कदापि कल्याण नहीं हो सकता बालक का प्रारंभिक ज्ञान ही पत्थर पर बनी अमित लकीर के समान होता है जो एक माता अपनी संतान को देती है ।  लेकिन वर्तमान समय में कुछ असामाज...